जैन धर्म के तीर्थंकर पर आधारित सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी सेट 

इस लेख में हमने जैन धर्म के तीर्थंकर पर आधारित  सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी दिया है जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है।
विश्व के सबसे प्राचीन धर्म जैन धर्म को श्रमणों का धर्म कहा जाता है। जैन धर्म का संस्थापक ऋषभ देव को माना जाता है, जो जैन धर्म के पहले तीर्थंकर थे और भारत के चक्रवर्ती सम्राट भरत के पिता थे। जैन पुराणों के अनुसार जो संसार सागर से पार लगाने वाले तीर्थ की रचना करते है, वह तीर्थंकर कहलाते हैं।
जैन धर्म में कुल 24 तीर्थंकर हुए हैं, जो इस प्रकार है- (1) ऋषभदेव, (2) अजितनाथ, (3) सम्भवनाथ, (4) अभिनन्दन, (5) सुमतिनाथ, (6) पद्मप्रभु, (7) सुपार्श्वनाथ, (8) चन्द्रप्रभ, (9) सुविधिनाथ, (10) शीतलनाथ, (11) श्रेयांसनाथ, (12) वासुपूज्य, (13) विमलनाथ, (14) अनंतनाथ, (15) धर्मनाथ, (16) शांतिनाथ, (17) कुंथुनाथ, (18) अरसनाथ, (19) मल्लिनाथ, (20) मुनिसुब्रत, (21) नेमिनाथ, (22) अरिष्टनेमि, (23) पार्श्वनाथ, एवं (24) महावीर स्वामी।
तीर्थंकर का अर्थ संसार सागर से पार कराने के लिए औरों को मार्ग बताने वाला होता है। जैन धर्म के संस्थापक तथा पहले तीर्थंकर ऋषभदेव थे। इन्हें आदिनाथ के नाम से भी जाना जाता है। ऋग्वेद में ऋषभदेव/आदिनाथ की चर्चा हुई है।

जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ थे। ये काशी के इक्ष्वाकु वंशीय राजा अश्वसेन के पुत्र थे। पार्श्वनाथ ने चार शिक्षाएं दी थी – (1) सत्य बोलो, (2) चोरी न करो, (3) हिंसा न करो (4) सम्पति न रखो।
जैनियों के 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी हुए। जैन धर्म का वास्तविक संस्थापक महावीर स्वामी को ही माना जाता है। महावीर स्वामी का जन्म 540 ई०पू० में वैशाली के निकट कुण्डग्राम में हुआ था। इनका बचपन का नाम वर्धमान था। बाद में इन्हें महावीर जैन कहा जाने लगा। ये वर्ण के क्षत्रिय एवं कुल के ज्ञातृक थे। इनके पिता का नाम सिद्धार्थ था जो वज्जि संघ के प्रमुख सरदार थे। इनकी माता त्रिशला लिच्छवि शासक चेटक की बहन थी। इनके बड़े भाई का नाम नंदिवर्धन था। महावीर स्वामी की पत्नी का नाम यशोदा तथा पुत्री का नाम अनोज्जा पिर्यदर्शनी था। इनके दामाद का नाम जमाली था।
महावीर स्वामी ने 30 वर्ष तक गृहस्थ जीवन जीया था। उस समय तक उनके पिता का देहांत हो चुका होता है। 30 वर्ष के बाद वे अपने बड़े भाई नंदिवर्धन से आज्ञा लेकर घर-गृहस्थी को त्याग दिया। 12 वर्ष तक लगातार कठोर तपस्या एवं साधना के बाद 42 वर्ष की अवस्था में महावीर को जृम्भिका ग्राम के नजदीक ऋजुपालिका नदी के किनारे एक साल के वृक्ष के नीचे कैवल्य (ज्ञान) प्राप्त हुआ। ज्ञान प्राप्ति के बाद महावीर जिन (विजेता), अर्हत (पूज्य) और निर्गन्ध (बंधनहीन) कहलाए।
महावीर स्वामी ने अपना धर्म केंद्र यानी उनकी अपनी जो विचारधारा थी, उसका प्रचार-प्रसार का केंद्र वैशाली को बनाया। महावीर के प्रथम अनुयायी उनके दामाद जामिल बने। तथा प्रथम महिला अनुयायी चम्पा बनी थी। महावीर स्वामी ने अपने उपदेश प्राकृत (अर्धमागधी) भाषा में दिए थे। उनके ग्रंथ भी प्राकृत भाषा में लिखे गए हैं।
महावीर स्वामी ने त्रिरत्न दिए – (1) सम्यक ज्ञान, (2) सम्यक दर्शन और (3) सम्यक आचरण। उन्होंने बोला कि सम्यक ज्ञान प्राप्त करो यानी सही ज्ञान प्राप्त करो, उसके बाद उन्होंने बोला कि सम्यक दर्शन प्राप्त करो यानी जो भी चीजों को देखो अच्छी चीजों को देखो फिर उन्होंने बोला कि सम्यक आचरण करो अर्थात अपना आचरण इस तरह सुधारो की दूसरों को कष्ट न पहुंचे, दूसरों का दिल न दुखे।
महावीर स्वामी ने पार्श्वनाथ द्वारा दिए गए चार महाव्रतों में पांचवा महाव्रत जोड़ा- ब्रह्मचर्य। जो इस प्रकार है- (1) अहिंसा (हिंसा न करो, (2) सत्य (हमेशा सत्य बोलो), (3) अपरिग्रह (जरूरत से अधिक संपत्ति इकट्ठा न करो), (4) अस्तेय (चोरी न करो) एवं (5) ब्रह्मचर्य।
जैन धर्म में ईश्वर की मान्यता नहीं है यानी इनके अनुसार ईश्वर नहीं है। वे आत्मा में विश्वास करते हैं।
 महावीर स्वामी कर्मवाद और पुनर्जन्म में विश्वास करते हैं। कर्मवाद यानी आप जैसा कर्म (काम) करेंगे, वैसा ही फल मिलेगा।
 जैनधर्म ने सप्तभंगी ज्ञान के अन्य नाम स्यादवाद और अनेकांतवाद है।
 72 वर्ष की आयु में भगवान महावीर की मृत्यु (निर्वाण) 468 ई०पू० में बिहार राज्य के पावापुरी में हो गई।
 जैन धर्म का आध्यात्मिक विचार सांख्य दर्शन (प्रतिपादक- कपिल मुनि) से लिया गया है।
 महावीर स्वामी ने पावा में अपने ग्यारह प्रमुख अनुयायियों के साथ एक संघ की स्थापना की ये ग्यारह शिष्य गणधर कहे जाते थे। इन ग्यारह गणधरों में केवल एक गणधर सुधर्मन ही महावीर स्वामी की मृत्यु के बाद भी जीवित रहे थे।
 जैन धर्म मानने वाले प्रमुख राजा थे- उदायिन, चन्द्रगुप्त मौर्य, कलिंग नरेश खारवेल, चंदेल शासक, राष्ट्रकूट राजा अमोघवर्ष इत्यादि।

 चौथी शताब्दी ई०पू० में मगध में 12 वर्षों तक भीषण अकाल पड़ जाता है जिससे भद्रबाहु अपने अनुयायियों को लेकर कर्नाटक चले गए थे। और स्थूलभद्र जो थे वो मगध में ही रह गए थे। कुछ समय बाद अकाल खत्म हो जाने पर भद्रबाहु वापस मगध चले आये जब वे यहां आए तो उन्होंने देखा कि जो मगध में रहने वाले जैनी लोग हैं उन्होंने अपनी पूरी विचारधारा ही बदल दिया है, कपड़े पहनने लगे हैं, अलग तरह से रहन-सहन शुरू कर दिए हैं तो इन दोनों में भद्रबाहु और स्थूलभद्र में मतभेद हो गया। जब इन दोनों में मतभेद हो गया तो एक संगीति बुलायी और उस संगीति में जैन सम्प्रदाय दो अलग-अलग उपसम्प्रदायों में बंट गया। भद्रबाहु के समर्थक दिगम्बर (नग्न रहने वाले) कहलाये। ये कोई भी कपड़े शरीर पर धारण नहीं करते थे। स्थूलभद्र के समर्थक श्वेताम्बर (श्वेत वस्त्र धारण करने वाले) कहलाये। यानि ये श्वेत कपड़े पहनने लगे थे।
 जैन धर्म में दो महत्वपूर्ण संगीतियां हुई थी। प्रथम जैन संगीति का आयोजन 322 ई०पू० में पाटलिपुत्र (बिहार) में चन्द्रगुप्त मौर्य के शासनकाल में स्थूलभद्र की अध्यक्षता में हुई थी। इसी संगीति में जैन धर्म दो भागों में बंट गया था। द्वितीय जैन संगीति का आयोजन 512 ई० में वल्लभी (गुजरात) में कुमारगुप्त-II के शासनकाल में देवाधि ऋषि की अध्यक्षता में हुई थी। इस संगीति में आगम ग्रंथ और क्षमाश्रवन ग्रंथों को लिखा गया था।
 भद्रबाहु ने जैन धर्म के सभी तीर्थंकरों की जीवनियों का संकलन कल्पसूत्र नामक पुस्तक में किया था। यह संस्कृत में लिखा गया है।
 थेरापंथी, तेरापंथी, बिसपंथी ये सभी जैन धर्म के उपसम्प्रदाय हैं।

जैन धर्म से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर

1.जैन धर्म में कुल कितने तीर्थंकर हुए हैं?
A 14
B 20
C 22
D 24
Ans.- D
2.जैनियों के पहले तीर्थंकर कौन थे?
A आदिनाथ
B अरिष्टनेमि
C पार्श्वनाथ
D अजितनाथ
Ans.- A
3.निम्नलिखित में से कौन जैन धर्म के असली संस्थापक माने जाते हैं?
A ऋषभदेव
B महावीर स्वामी
C पार्श्वनाथ
D नेमिनाथ
Ans.- B
4.महावीर स्वामी का जन्म कहाँ हुआ था?
A कपिलवस्तु में
B कुण्डग्राम में
C पावापुरी में
D मगध
Ans.- B
5.महावीर का जन्म किस क्षत्रिय गोत्र में हुआ था?
A लिच्छवि
B सल्लास
C शाक्य
D ज्ञातृक
Ans.- D
6.महावीर की माता कौन थी?
A त्रिशला
B देवानन्दी
C यशोदा
D अनोज्जा पिर्यदर्शनी
Ans.- A
7.महावीर की मृत्यु कहाँ हुई थी?
A श्रवणबेलगोला
B लुम्बनी
C पावापुरी
D पाटलिपुत्र
Ans.- C
8.महावीर का मूल नाम क्या था?
A गौतम
B वर्धमान
C सिद्धार्थ
D इनमें से कोई नहीं
Ans.- B
9.'जियो और जीने दो' किसने कहा?
A गौतम बुद्ध
B महावीर स्वामी
C महात्मा गांधी
D विनोबा भावे
Ans.- B
10.जैन धर्म में 'पूर्ण ज्ञान' के लिए क्या शब्द है?
A निर्वाण
B जिन
C रत्न
D कैवल्य
Ans.- D
11.महावीर एवं बुद्ध दोनों ने किसके शासनकाल में उपदेश दिया?
A बिम्बिसार
B अजातशत्रु
C उदायिन
D कालाशोक
Ans.- A
12.निम्नलिखित में से कौन सबसे पूर्वकालिक जैन ग्रंथ कहलाता है?
A बारह उपांग
B बारह अंग
C चौदह उपपूर्व
D चौदह पूर्व
Ans.- D
13.जैन साहित्य को क्या कहते हैं?
A आगम
B त्रिपिटक
C वेद
D आर्यसूत्र
Ans.- A
14.भगवान महावीर का प्रथम शिष्य कौन था?
A प्रभाष
B योसुद
C जमालि
D बिपिन
Ans.- C
15.'स्यादवाद' किसका सिद्धांत है?
A वैष्णव धर्म का
B भागवत धर्म का
C बौद्ध धर्म का
D जैन धर्म का
Ans.- D
16.त्रिरत्न सिद्धांत- सम्यक ज्ञान, सम्यक दर्शन, सम्यक आचरण- जिस धर्म की महिमा है, वह है-
A जैन धर्म
B बौद्ध धर्म
C ईसाई धर्म
D इनमें से कोई नहीं
Ans.- A
17.जैन समुदाय में प्रथम विभाजन के श्वेतांबर सम्प्रदाय के संस्थापक कौन थे?
A भद्रबाहु
B स्थूलबाहु
C देवर्षि क्षमाश्रवन
D कालकाचार्य
Ans.- B
18.प्रथम जैन संगीति का आयोजन कहाँ हुआ था?
A पावा में
B वल्लभी में
C पाटलिपुत्र में
D आबू
Ans.- C
19.द्वितीय जैन संगीति का आयोजन  कहाँ हुआ था?
A आबू में
B वल्लभी में
C पाटलिपुत्र में
D पावा में
Ans.- B
20.जैन साहित्य का संकलन किस भाषा व लिपि में किया गया है?
A प्राकृत व अर्धमागधी
B पालि व पूर्ण मागधी
C संस्कृत व ब्राह्मी
D संस्कृत व देवनागरी
Ans.- A
21.'अणुव्रत' शब्द किस धर्म से जुड़ा है?
A बौद्ध धर्म
B हिन्दू धर्म
C लोकायत मत
D जैन धर्म
Ans.- D
22.महावीर की मृत्यु के बाद जैन संघ का अगला अध्यक्ष कौन हुआ?
A वज्रस्वामी
B सुधर्मन
C मल्लिनाथ
D गोशाल
Ans.- B
23.जैन ग्रंथ 'कल्प सूत्र' की रचना किसने की थी?
A स्थूलबाहु
B हेमचंद
C भद्रबाहु
D स्वयंभू
Ans.- C
24.जैन तीर्थंकर पार्श्वनाथ द्वारा प्रतिपादित चार महाव्रतों में महावीर स्वामी ने पांचवें महाव्रत के रूप में क्या जोड़ा?
A अहिंसा
B सत्य
C अपरिग्रह
D ब्रह्मचर्य
Ans.- D
25.स्वामी महावीर के भिक्षुणी संघ की प्रधान कौन थी?
A त्रिशला
B खेमा
C चन्दना
D सुजाता
Ans.- A

जैन धर्म से संबंधित Explanation सहित महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर

1. निम्नलिखित में से किस जैन तीर्थंकर को जैन साहित्य में प्रजापति, आदिब्रह्मा और आदिनाथ के रूप चित्रित किया गया है?

A. ऋषभनाथ
B. अजीतनाथ
C. सम्भव नाथ
D. अभिनंदन नाथ
Ans: A
Explanation: ऋषभदेव जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर हैं। तीर्थंकर का अर्थ होता है जो तीर्थ की रचना करें। जो संसार सागर (जन्म मरण के चक्र) से मोक्ष तक के तीर्थ की रचना करें, वह तीर्थंकर कहलाते हैं। ऋषभदेव जी को आदिनाथ भी कहा जाता है। भगवान ऋषभदेव वर्तमान अवसर्पिणी काल के प्रथम दिगम्बर जैन मुनि थे। इसलिए, A सही विकल्प है।

2. ऋषभनाथ को आदिब्रह्मा क्यों बोला जाता है?
A. अपने लंबे कद की वजह से
B. सबसे पहले मोक्ष मार्ग बताने की वजह से
C. धार्मिक रूपांतरण करने की वजह से
D. आजीविका का मार्ग दिखाने की वजह से
Ans: B
Explanation: जैन धर्म के धर्मोपदेशक तीर्थंकर या जिन कहलाते हैं। जैन धर्म के सबसे पहले तीर्थंकर ऋषभदेव थें जिन्हें ऋषभनाथ, बृषभदेव या आदिनाथ भी कहा जाता है। इनको आदिब्रह्मा भी बोला जाता है क्योंकी ये पहले जैन तीर्थंकर थे जिन्होंने मोक्ष मार्ग बताया था। इसलिए, B सही विकल्प है।

3. निम्नलिखित में से कौन सा प्रतीक चिह्न ऋषभदेव तीर्थंकर का है?
A. गाय
B. बैल
C. हाथी
D. टाइगर
Ans: B
Explanation: ऋषभदेव जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर हैं। इनका प्रतीक चिह्न बैल है। इसलिए, B सही विकल्प है।

4. अपने दाहिने पैर के निशान के कारण ऋषभनाथ तीर्थंकर को क्या नाम दिया गया था?
A. हिरण्यगर्भ
B. प्रजापति
C. ऋषभ
D. वृहद देव
Ans: C
Explanation: ऋषभनाथ तीर्थंकर दाहिने पैर पर बैल के निशान की वजह से इनको ऋषभ नाम दिया गया था। इसलिए, C सही विकल्प है।

5. ऋषभनाथ तीर्थंकर के पिता का नाम क्या था?
A. नाभिराय
B. सम्भवनाथ
C. सुमितनाथ
D. वासुपूज्य
Ans: A
Explanation: जैन पुराणों के अनुसार, ऋषभनाथ तीर्थंकर के पिता का नाम राजा नाभिराज था। इसलिए, A सही विकल्प है।
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6. अपने पिता नाभिराय के कारण ऋषभनाथ तीर्थंकर को क्या नाम दिया गया था?
A. धर्म नाथ
B. अनंतनाथ
C. चन्द्र प्रभु
D. नभिसुनु
Ans: D
Explanation: जैन पुराणों के अनुसार, ऋषभनाथ तीर्थंकर के पिता का नाम राजा नाभिराज था और अपने पिता नाभिराय नाम के कारण ऋषभनाथ तीर्थंकर को नभिसुनु भी बोला जाता था। इसलिए, D सही विकल्प है।

7. ऋषभनाथ की माता का नाम क्या था?
A. तारा
B. श्रेमेस्था
C.  मरुदेवी
D. अनुराधा
Ans: C
Explanation: जैन पुराणों के अनुसार, ऋषभनाथ की माता का महारानी मरूदेवी नाम था। इसलिए, C सही विकल्प है। 

8. निम्नलिखित में से कौन सी शिक्षा ऋषभनाथ द्वारा युग के आदि में लोगों को दी गई थी?
A. कृषि
B. मासी
C. असी
D. उपरोक्त सभी
Ans: D
Explanation: कुलकरों की कुल परंपरा के सातवें कुलकर नाभिराज और उनकी पत्नी मरुदेवी से ऋषभदेव का जन्म चैत्र कृष्ण की अष्टमी-नवमी को अयोध्या में हुआ था। इन्होने युग के आदि में लोगों को कृषि, मासी और असी जैसे विषयों पर शिक्षा दी था। इसलिए, D सही विकल्प है। 

9. मसि का अर्थ क्या है?
A. अध्यापन
B. रक्षा
C. कृषि
D. बिजनेस
Ans: A
Explanation: जैन पुराणों के अनुसार, मसि का शाब्दिक अर्थ अध्यापन होता है। इसलिए, A सही विकल्प है। 

10. युग के आदि में ऋषभनाथ द्वारा कृषि, स्याही, तलवार, शिल्प और सेवा के अलावा अंतिम कर्म पर किस विषय पर शिक्षा दिया गया था?
A. व्यापार
B. मत्स्य
C. युद्ध
D. उपरोक्त सभी
Ans: A
Explanation: युग के आदि में भगवान आदिनाथ का जन्म हुआ था इसीलिए भगवान ऋषभनाथ को आदिनाथ के नाम से जाना जाता है। उन्होंने इस सृष्टि को असि, मसि,विद्या,वाणिज्य और शिल्पकला की तालीम दी और संसार से वैराग्य धारण कर अंत में अष्टापद से मोक्ष अर्थात निर्वाण की प्राप्ति की। । इसलिए, A सही विकल्प है।

11. निम्नलिखित में किस तीर्थंकर के निर्वाण के बहुत काल बीत जाने पर तृतीय तीर्थंकर श्री सम्भवनाथ का जन्म हुआ था?
A. ऋषभनाथ
B. अजीतनाथ
C. अभिनंदन
D. पद्यप्रभु
Ans: B
Explanation: सम्भवनाथ तीसरे जैन तीर्थंकर थे। द्वितीय तीर्थंकर अजितनाथ के निर्वाण के बाद बहुत काल बीत जाने पर तृतीय तीर्थंकर श्री सम्भवनाथ का जन्म हुआ था। इसलिए, B सही विकल्प है।

12. निम्नलिखित में से किस कारण से राजा विपुलवाहन के मन में संसार से विरक्ति उत्पन्न हो गई थी?
A. पत्नी की वजह से
B. पुत्र के कारण
C. अकाल के कारण
D. विषयों के कारण
Ans: C
Explanation: राजा विपुलवाहन, प्रकृति की क्रूर लीला जैसे सुखा और बाढ़ की स्थिति देखकर राजा विपुलवाहन के मन में संसार से विरक्ति उत्पन्न हो गई और पुत्र को राज्य सौंपकर वह मुनि बन गये थे। इसलिए, C सही विकल्प है।

13. 'जैन धर्म' का अर्थ है - '........................'।
A. जिन द्वारा प्रवर्तित धर्म
B. सोच की पूर्वता द्वारा प्रवर्तित धर्म
C. विचार प्रक्रिया द्वारा प्रवर्तित धर्म
D. उपरोक्त में से कोई नहीं
Ans: A
Explanation: 'जैन धर्म' का अर्थ है - 'जिन द्वारा प्रवर्तित धर्म'। जो 'जिन' के अनुयायी हों उन्हें 'जैन' कहते हैं। 'जिन' शब्द बना है 'जि' धातु से। 'जि' माने - जीतना। इसलिए, A सही विकल्प है।

14. सम्भवनाथ ने केवल ज्ञान प्राप्त करने के लिए कितने वर्षो तक कठोर तप किया था?
A. 10
B. 12
C. 14
D. 16
Ans: C
Explanation: चौदह वर्षों की साधना के पश्चात् सम्भवनाथ ने केवल ज्ञान प्राप्त कर धर्मतीर्थ 
की स्थाप्ना की थी। इसलिए, C सही विकल्प है।

15. निम्नलिखित में से कौन सा चिह्न सम्भवनाथ तीर्थंकर का है?
A. हाथी
B. गाय
C. अश्व
D. कछुआ
Ans: C
Explanation: 'अश्व' सम्भवनाथ तीर्थंकर का चिह्न है। इसलिए, C सही विकल्प है।

16. सम्भवनाथ तीर्थंकर के प्रतीक अश्व का अर्थ क्या था?
A. गति
B. संयमित हृदय
C. गुस्सा
D.  चार्म
Ans: B
Explanation: सम्भवनाथ तीर्थंकर का मानना था की जिस प्रकार अच्छी तरह से लगाम डाला हुआ अश्व युद्धों में विजय दिलाता है, उसी प्रकार संयमित मन जीवन में विजय दिलवा सकता है। इसलिए, B सही विकल्प है।

17. सम्भवनाथ तीर्थंकर का प्रतीक चिन्ह घोड़ किस नैतिकता को सम्भोधित करता है?
A. विनम्रता
B. संयम
C. ज्ञान
D. उपरोक्त सभी
Ans: D
Explanation: सम्भवनाथ तीर्थंकर का मानना था की जिस प्रकार अच्छी तरह से लगाम डाला हुआ अश्व युद्धों में विजय दिलाता है, उसी प्रकार संयमित मन जीवन में विजय दिलवा सकता है। प्रतीक चिन्ह घोड़ विनम्रता, संयम और ज्ञान को सम्भोधित करता है। इसलिए, D सही विकल्प है।

18. युवावस्था के दौरान, मध्ययुगीन बादलों के फैलाव को देखते हुए सम्भवनाथ तीर्थंकर ने क्या महसूस किया करते थे?
A. एकजुटता
B. मृत्यु
C. हर्ष
D. दुःख
Ans: B
Explanation: जैन पुराणों के अनुसार, एक बार महाराज सम्भवनाथ सन्ध्या के समय अपने प्रासाद की छ्त पर टहल रहे थे। सन्ध्याकालीन बादलों को मिलते-बिखरते देखकर उन्हें वैराग्य की प्रेरणा हुई। सम्भवनाथ के मनोभावों को देखकर जीताचार से प्रेरित हो लोकान्तिक देव उपस्थित हुए। उन्होंने प्रभु के संकल्प की अनुमोदना की। इसलिए, B सही विकल्प है।

19. सम्भवनाथ तीर्थंकर के धर्म परिवार में कितने गणधर थे?
A. 95
B. 105
C. 115
D. 125
Ans: B
Explanation: सम्भवनाथ तीर्थंकर के धर्म परिवार मे चारुषेण आदि एक सो पाँच गणधर, दो लाख श्रमण, तीन लाख छ्त्तीस हज़ार श्रमणियाँ, दो लाख तिरानवे हज़ार श्रावक और छ्ह लाख छ्त्तीस हज़ार श्राविकाएँ थीं। इसलिए, B सही विकल्प है।

20. जैन शास्त्र के अनुसार, मणो साहस्सिओ भीमो, ………………………
A. सीधा
B. अ सी साहू
C. नामोढ़अस्तिअधेयबह्ह्य
D. दुटठस्सो परिधावइ
Ans: D
Explanation: जैन शास्त्रों में कहा गया है- 'मणो साहस्सिओ भीमो, दुटठस्सो परिधावइ‘ अर्थात 'मन दुष्ट अश्व की तरह बड़ा साहसी और तेज दौडने वाला है। इसलिए, D सही विकल्प है।

21. निम्नलिखित में से किस स्थान पर अजितनाथ तीर्थंकर का जन्म हुआ था?
A. अयोध्या
B. किष्किन्धा
C. नासिक
D. उज्जैन
Ans: A
Explanation: अजितनाथ जैन धर्म के 24 तीर्थकरो में से वर्तमान अवसर्पिणी काल के द्वितीय तीर्थंकर है। इनका जन्म अयोध्या के राजपरिवार में हुआ था। इसलिए, A सही विकल्प है।

22. अजितनाथ अपने पूर्वभव में किस नाम से जाने जाते थे?
A. सिद्धार्थ
B. महाराज विमलवाहन
C. महावीर
D. उपरोक्त में से कोई नहीं
Ans: B
Explanation: अजितनाथ एक जैन तीर्थकर थे, जिनका जन्म अयोध्या के राजपरिवार में हुआ था। अपने पूर्वभव में महाराज विमलवाहन नाम से जाने जाते थे। इसलिए, B सही विकल्प है।

23. तीर्थंकर अजितनाथ किसके प्रभाव से वैराग्य अपना लिया था?
A. पदप्रभु
B. आचार्य अरिदमन
C. अरहनाथ
D. नामिनाथ
Ans: B
Explanation: अजितनाथ जैन धर्म के द्वितीय तीर्थंकर है। आचार्य अरिदमन के प्रभाव से विरक्त हो गये थे। इसलिए, B सही विकल्प है।

24. तीर्थंकर अजितनाथ के माता का क्या नाम था?
A. विजया
B. तारा
C. शर्मिष्ठा
D. गीता
Ans: A
Explanation: अजितनाथ एक जैन तीर्थकर थे, जिनका जन्म अयोध्या के राजपरिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम जितशत्रु और माता का नाम विजया था। इनका जन्म माघ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी और निर्वाण शुक्ल पक्ष के चैत्र मास की पंचमी के दिन 'सम्मेद शिखर' (सम्मेत शिखर) पर हुआ था। इसलिए, A सही विकल्प है।

25. अजितनाथ तीर्थंकर का वैवाहिक जीवन कैसा था?
A. सामान्य
B. अच्छा
C. बहुत अच्छा
D. बहुत बुरा

Ans: D
Explanation: अजितनाथ का विवाह माता-पिता की इच्छा से हुआ था, लेकिन वे आरम्भ से ही विरक्त रहे। युवावस्था में घरबार छोड़कर कठोर तप करने चले गए थे। इसलिए, D सही विकल्प है।

26. युवावस्था में अजितनाथ घरबार छोड़कर कितने वर्षो तक कठोर तप किया था?
A. दस
B. बारह
C. चौदह
D. सोलह
Ans: B
Explanation: युवावस्था में घरबार छोड़कर अजितनाथ ने बारह वर्ष कठोर तप किया था। 
इसलिए, B सही विकल्प है।

27. अजितनाथ तीर्थंकर के धर्म परिवार में कितने गणधर थे?
A. 80
B. 85
C. 90
D. 95
Ans: D
Explanation: अजितनाथ तीर्थंकर के धर्म परिवार में 95 गणधर थे। इसलिए, D सही विकल्प है।

28. अजितनाथ तीर्थंकर के धर्म परिवार में कितने साधु थे?
A. 50 हजार
B. एक लाख
C. एक लाख पचास हजार
D. दो लाख
Ans: B
Explanation: अजितनाथ तीर्थंकर के धर्म परिवार में 1 लाख साधु थे। इसलिए, B सही विकल्प है।

29. अजितनाथ तीर्थंकर के पिता का नाम क्या था?
A. जितशत्रु
B. मल्लीनाथ
C. पार्श्वनाथ
D. नेमिनाथ
Ans: A
Explanation: 'पउम चरिय' के अनुसार अजितनाथ का जन्म जितशत्रु के यहाँ हुआ था, जो साकेत के राजा थे। इसलिए, A सही विकल्प है।

30. अजितनाथ तीर्थंकर का जन्म शुक्ल पक्ष के किस हिंदू महीने में हुआ था?
A. माघ
B. चैत्र
C. अश्विन
D. ज्येठ
Ans: A
Explanation: अजितनाथ का जन्म माघ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी और निर्वाण शुक्ल पक्ष के चैत्र मास की पंचमी के दिन 'सम्मेद शिखर' (सम्मेत शिखर) पर हुआ था। वे जैन धर्म के द्वितीय तीर्थकर माने जाते हैं। इसलिए, A सही विकल्प है।